विवाह मुहूर्त

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अपने विवाह समारोह के लिए सबसे शुभ तिथियाँ खोजें। हमारा वैदिक इंजन तिथि, नक्षत्र, योग, करण और 16+ मुहूर्त योगों का विश्लेषण करता है।

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विवाह मुहूर्त के बारे में

विवाह मुहूर्त — जिसे विवाह मुहूर्तम, विवाह मुहूर्त्तम, या केवल वेडिंग मुहूर्त भी कहा जाता है — वैदिक ज्योतिष द्वारा हिंदू विवाह समारोह के लिए चुना गया सटीक शुभ क्षण है। इसे किसी व्यक्ति के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण मुहूर्त गणना माना जाता है, क्योंकि विवाह के क्षण पर ग्रहों की स्थिति को दशकों तक जोड़े के स्वास्थ्य, सामंजस्य, संतति, और समृद्धि को आकार देने वाला माना जाता है। सही चुना गया विवाह मुहूर्त संबंध की ऊर्जावान नींव रखता है; गलत समय पर किया गया विवाह परंपरागत रूप से अनावश्यक क्लेश को निमंत्रण देने वाला माना जाता है।

तो, व्यावहारिक रूप में विवाह मुहूर्त क्या है? यह एक दिनांक-समय खिड़की है जहाँ पंचांग के पाँचों अंग — तिथि, नक्षत्र, योग, करण, और वार — अनुकूल रूप से संरेखित होते हैं, और जहाँ कोई विवाह-विशिष्ट दोष (भद्रा, पंचक, चातुर्मास, शुक्र अस्त, गुरु अस्त, खरमास) सक्रिय नहीं होता। जब ये स्थितियाँ एक साथ बनती हैं, तो उस खिड़की को शुभ विवाह मुहूर्त कहा जाता है।

यही कारण है कि विवाह के लिए मुहूर्त महत्वपूर्ण है: प्रत्येक हिंदू विवाह — चाहे वह कोर्ट-पंजीकृत साधारण मिलन हो, पारंपरिक उत्तर भारतीय शादी हो, या भव्य दक्षिण भारतीय कल्याणम हो — शास्त्र-सम्मत मुहूर्त के अनुसार निर्धारित किया जाता है। परिवार पंडितों, ज्योतिषियों, या इस पृष्ठ जैसे डिजिटल फाइंडर से परामर्श करके उन तिथियों की सूची प्राप्त करते हैं जो वर-वधू दोनों की कुंडलियों, आयोजन स्थल की उपलब्धता, और 2026 के कैलेंडर के अनुकूल हों।

वैदिक महत्व

विवाह मुहूर्त का महत्व गृह्य सूत्र, मुहूर्त चिंतामणि, मुहूर्त मार्तंड, और धर्म शास्त्रों में निहित है, जो विवाह समय-निर्धारण को पूरे अध्याय समर्पित करते हैं। वराहमिहिर और नारद जैसे ऋषियों ने निर्दिष्ट किया कि सही मुहूर्त पर संपन्न विवाह बृहस्पति (गुरु), शुक्र, और चंद्रमा का आशीर्वाद आकर्षित करता है — ये तीन कारक वैवाहिक सुख, संतति, और समृद्धि से सबसे सीधे जुड़े हैं।

शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार विवाह के लिए कौन सा मुहूर्त अच्छा है:

  • शुभ नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद, रेवती
  • त्याज्य नक्षत्र: भरणी, कृत्तिका, आर्द्रा, आश्लेषा, ज्येष्ठा, और विशाखा का चतुर्थ पाद
  • शुभ तिथियाँ: शुक्ल पक्ष की 2, 3, 5, 7, 10, 11, और 13 तिथियाँ; अमावस्या, पूर्णिमा, चतुर्थी, और रिक्ता तिथियों से बचें
  • शुभ वार: सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, और रविवार प्राथमिक; मंगलवार और शनिवार पारंपरिक रूप से त्याज्य

क्या विवाह के लिए अभिजीत मुहूर्त अच्छा है? अभिजीत मुहूर्त — स्थानीय दोपहर के आसपास की लगभग 48-मिनट की खिड़की — अधिकांश शुभ आरंभों के लिए अत्यंत शुभ है, परंतु विवाह के लिए इसे द्वितीयक विकल्प माना जाता है, जिसका उपयोग केवल तब होता है जब समर्पित विवाह लग्न उपलब्ध न हो। शास्त्रीय विद्वान लग्न-आधारित विवाह मुहूर्त को प्राथमिकता देते हैं क्योंकि जिस क्षण वर-वधू हस्तमिलाप करते हैं उस समय का उदित राशि स्थिर और शुभ ग्रहों से दृष्ट होना चाहिए।

शुभ नक्षत्र

रोहिणीमृगशिरामघाउत्तरा फाल्गुनीहस्तस्वातिअनुराधामूलउत्तराषाढ़ाउत्तरा भाद्रपदरेवती

वर्जित नक्षत्र

भरणीकृत्तिकाआर्द्राआश्लेषाज्येष्ठाविशाखा (चौथा चरण)

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वर-वधू की कुंडली से विवाह मुहूर्त कैसे निकालें?

लोग अक्सर पूछते हैं कि कुंडली से विवाह मुहूर्त कैसे निकालें, मुहूर्तम की गणना कैसे होती है, विवाह तिथियाँ कैसे तय होती हैं, और विवाह मुहूर्त को विश्वसनीय रूप से कैसे जाँचें। शास्त्रीय वैदिक प्रक्रिया सात जाँचों का अनुसरण करती है, और कोई भी गंभीर मुहूर्त इंजन (इसमें यह भी सम्मिलित) इनको क्रम से चलाता है:

  1. 1. कुंडली मिलान (गुण मिलान): वर-वधू की कुंडलियों का अष्टकूट मिलान (36 गुण) करें। 18+ का स्कोर न्यूनतम आधार है। पूरा कुंडली मिलान देखें →
  2. 2. तारा बल: उम्मीदवार तिथि के नक्षत्र की दोनों साथियों के जन्म नक्षत्रों से जाँच करें। संपत, क्षेम, साधना, मित्र, और अति-मित्र तारा शुभ हैं।
  3. 3. चंद्र बल: गोचर का चंद्र दोनों साथियों के जन्म चंद्र से 1, 3, 6, 7, 10, या 11वें भाव में स्थित होना चाहिए।
  4. 4. लग्न शुद्धि: सटीक विवाह क्षण पर उदित राशि पापग्रह-रहित हो, और विवाह के 7वें भाव पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो।
  5. 5. सूर्य व गुरु बल: दोनों ज्योति अस्त नहीं होने चाहिए — इसीलिए शुक्र अस्त और गुरु अस्त काल पूर्णतः त्याग दिए जाते हैं।
  6. 6. दोष शोधन: तिथि को भद्रा, पंचक, दग्ध योग, मरण योग, चातुर्मास, पितृ पक्ष, खरमास (मलमास), होलाष्टक, और शून्य तिथि से मुक्त होना चाहिए।
  7. 7. अंतिम स्कोरिंग: शेष तिथियों को सकारात्मक योगों — रवि पुष्य, गुरु पुष्य, अमृत सिद्धि, और सर्वार्थसिद्धि — का उपयोग करके रैंक किया जाता है, जिससे शुभ विवाह मुहूर्त की अंतिम सूची बनती है।

यह सात-चरणीय कार्यप्रवाह ही वह तरीका है जिससे हिंदू विवाह के लिए मुहूर्त की गणना बिना कोई नियम चूके की जाती है। एक प्रशिक्षित पंडित को प्रति जोड़ा कई घंटे लगते हैं; हमारा इंजन इसे सेकंडों में चलाता है — 2026 या 2027 की किसी भी तिथि सीमा के लिए, आपके और आपके साथी के नक्षत्र के अनुसार व्यक्तिगत। ऊपर की तिथि खोज का उपयोग करें →

तो, 2026 में विवाह के लिए कौन सा महीना अच्छा है?

वैदिक शास्त्र विशेष हिंदू महीनों में विवाह की अनुमति देते हैं: माघ, फाल्गुन, वैशाख, ज्येष्ठ, और मार्गशीर्ष एवं पौष के कुछ भाग। 2026 के लिए ग्रेगोरियन में, सबसे सशक्त विवाह काल जनवरी अंत से जुलाई मध्य तक, और फिर नवंबर मध्य से दिसंबर मध्य तक चलते हैं।

विवाह के लिए सामान्यतः त्याज्य काल:

  • चातुर्मास: देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक, लगभग जुलाई से नवंबर — भगवान विष्णु योग-निद्रा में होते हैं, इसलिए विवाह संपन्न नहीं होते।
  • पितृ पक्ष: भाद्रपद में पूर्वजों की पूजा का पक्ष, सितंबर–अक्टूबर।
  • खरमास / मलमास: जब सूर्य धनु और मीन राशि में संक्रमण करता है — दिसंबर मध्य से जनवरी मध्य, और मार्च मध्य से अप्रैल मध्य।
  • होलाष्टक: होली से पहले के आठ दिन।
  • शुक्र अस्त व गुरु अस्त: शुक्र और बृहस्पति (गुरु) के अस्त काल।

2026 में विवाह के लिए कितने मुहूर्त हैं? मानक वैदिक मानदंडों के आधार पर, हम आमतौर पर प्रति वर्ष 50–60 शुभ विवाह मुहूर्त पाते हैं, और 2027 में भी — माघ, फाल्गुन, चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़ (प्रथम पक्ष), कार्तिक (अंतिम सप्ताह), मार्गशीर्ष, और पौष (प्रथम पक्ष) में फैले हुए।अपनी पसंदीदा तिथि सीमा के लिए शुभ विवाह मुहूर्तों की पूर्ण, स्कोर-सहित सूची देखने के लिए — आपके नक्षत्र के अनुसार व्यक्तिगत, प्रत्येक तिथि के लिए तिथि, नक्षत्र, योग, करण, और लग्न सहित — इस पृष्ठ के शीर्ष पर स्थित तिथि फाइंडर का उपयोग करें। यह निःशुल्क, तुरंत है, और उन्हीं शास्त्रीय नियमों पर चलता है जिनका उपयोग पंडित करते हैं।

चातुर्मास, पितृ पक्ष, और अन्य अशुभ कालों के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए दैनिक पंचांग देखें →

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विवाह मुहूर्त कैसे काम करता है?

हमारा वैदिक इंजन आपकी चयनित तिथि सीमा के लिए तिथि, नक्षत्र, योग, करण और 16+ मुहूर्त योगों का विश्लेषण करता है और विस्तृत ज्योतिषीय तर्क के साथ शुभ विवाह तिथियों की सूची प्रदान करता है।

विवाह मुहूर्त में क्या विश्लेषण किया जाता है?

हम तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार, रवि पुष्य योग, गुरु पुष्य योग, अमृत सिद्धि योग, सर्वार्थसिद्धि योग, दग्ध योग, मरण योग और पंचक का विश्लेषण करते हैं।

क्या यह मुहूर्त खोजक मुफ्त है?

हाँ, सभी 19 जीवन घटनाओं के लिए पूरी तरह मुफ्त।

2026 में विवाह के लिए सबसे अच्छे महीने कौन से हैं?

माघ (जनवरी-फरवरी), फाल्गुन (फरवरी-मार्च), वैशाख (अप्रैल-मई), और मृगशिरा (मई-जून) परंपरागत रूप से शुभ हैं। चातुर्मास (जुलाई-नवंबर) विवाह के लिए सामान्यतः वर्जित है।

विवाह मुहूर्त और कुंडली मिलान में क्या अंतर है?

कुंडली मिलान दो कुंडलियों के बीच अनुकूलता का आकलन करता है। विवाह मुहूर्त समारोह के लिए शुभ समय है। दोनों महत्वपूर्ण हैं — पहले अनुकूलता, फिर समय। पूर्ण कुंडली मिलान के लिए wedding.vastucart.in पर जाएँ।

2026 में कितनी शुभ विवाह तिथियाँ हैं?

मानक वैदिक मानदंडों के आधार पर लगभग 40-50 तिथियाँ योग्य हैं। अपनी पसंदीदा तिथि सीमा के लिए विस्तृत विश्लेषण के साथ हमारे खोज टूल का उपयोग करें।

क्या पितृ पक्ष में विवाह हो सकता है?

पितृ पक्ष (पूर्वजों की श्रद्धा का पखवाड़ा) विवाह के लिए परंपरागत रूप से वर्जित है। यह भाद्रपद माह (सितंबर-अक्टूबर) में आता है। अधिकांश परिवार शरद नवरात्रि तक प्रतीक्षा करते हैं।

अस्वीकरण

Muhurta recommendations for marriage are based on Vedic astrology and astronomical calculations for informational purposes only. Please make important decisions using your own judgment and consult qualified professionals where appropriate.