हैदराबाद में ब्रह्म मुहूर्त की परंपरा
हैदराबाद में निज़ामी काल की नागरिक लय और वैष्णव आगम परंपरा साथ-साथ रहती हैं — और ब्रह्म मुहूर्त दूसरी में जीवित है। चिल्कूर बालाजी मंदिर, जिसे 'वीज़ा गॉड' कहते हैं, सुबह 5 बजे पहला अभिषेकम करता है; भक्त अक्सर 108 परिक्रमा का चक्र भोर की ठंडक में शुरू करते हैं। नौबत पहाड़ का बिड़ला मंदिर 7 बजे दर्शनार्थियों के लिए खुलता है, पर वहाँ के साधक पीछे के गर्भगृह में 4:30 बजे की पूजा करते हैं, और तपस्वी ब्रह्म मुहूर्त में पहाड़ी पर चढ़कर ग्रेनाइट शिलाओं के पास ध्यान लगाते हैं। पूर्वी छोर पर बना सांघी मंदिर पौने पाँच बजे सुप्रभातम करता है — पाठ की प्रतिध्वनि सात-स्तरीय राजगोपुरम से ऐसी गूँजती है जैसा 1991 में वास्तुकारों ने जानबूझकर रचा था। पुराने शहर में चारमीनार की भाग्यलक्ष्मी मंदिर का पहला दीप सूर्योदय पर जलता है और मक्का मस्जिद की फ़ज्र अज़ान उसी मिनट में होती है — वैदिक और इस्लामी भोर का यह संयोग हैदराबाद की अपनी पहचान है।
