पुणे में ब्रह्म मुहूर्त की परंपरा
आधुनिक भारतीय महानगरों में पुणे की गुरुकुल परंपरा सबसे गहरी है। 1930 में तिलक के बौद्धिक उत्तराधिकारियों द्वारा स्थापित 'वैदिक संशोधन मंडल' ब्रह्म मुहूर्त (4:30 बजे) में ऋग्वेद स्वाध्याय की दैनिक परंपरा अब भी निभाता है, जिसमें कुछ चुने पंडित हिस्सा लेते हैं। दगडूशेठ हलवाई गणपति की पहली आरती 6 बजे होती है, पर मंदिर ट्रस्ट की वैदिक पाठशाला में छात्र 4:30 बजे से मंत्र-पाठ शुरू करते हैं। जे.एम. रोड के पास पातालेश्वर गुफा मंदिर — आठवीं शताब्दी का राष्ट्रकूट-कालीन शैल-उत्कीर्ण गर्भगृह — सर्दियों के ब्रह्म मुहूर्त में एकाकी ध्यान के लिए सबसे पहले पहुँचे भक्तों के लिए जाना जाता है; गुफा का भीतरी तापमान साल भर 12°C रहता है। चातुर्मास में शनिवार वाड़ा की पुरानी ब्राह्मण गलियों में अब भी पौने पाँच बजे संध्या वंदन होता है। बी.के.एस. अयंगर का अयंगर योग संस्थान निवासी शिक्षकों के लिए ब्रह्म मुहूर्त अभ्यास अनिवार्य बनाए हुए है।
