जयपुर में ब्रह्म मुहूर्त की परंपरा
जयपुर का ब्रह्म मुहूर्त गोविंद देवजी से जुड़ा है — चौकपालेस में स्थित प्रमुख वैष्णव मंदिर, जहाँ 4:30 बजे होने वाली मंगला आरती किसी भी उत्तर भारतीय मंदिर के सबसे जल्दी दर्शनों में से एक है और एक बड़े नगर-आयोजन सी मानी जाती है। आरती दर्शन की खिड़की ठीक 15 मिनट की है; जाड़ों में लोग साढ़े तीन बजे से क़तार में लग जाते हैं। मंदिर का इतिहास सवाई जय सिंह द्वितीय तक जाता है, जिन्होंने 1715 में बृंदावन से लाई गई गोविंद देव की मूर्ति के लिए यह मंदिर बनवाया। नगर के दक्षिण-पूर्व में अरावली की तलहटी पर बना गलता जी ('मंकी टेंपल') 5 बजे अभिषेकम करता है, और प्राकृतिक कुंड में पूर्व-भोर का स्नान किया जाता है। सांघी जी जैन मंदिर 4:30 बजे प्रातः प्रतिक्रमण करता है। 1734 में निर्मित जंतर मंतर वेधशाला — दुनिया के उन गिनेचुने यंत्रों में से है जो संध्या-समय की सटीक गणना के लिए बने थे।
