कानपुर में ब्रह्म मुहूर्त की परंपरा
कानपुर का ब्रह्म मुहूर्त संस्कार उन मंदिरों में जीवित है जिन्हें 19वीं सदी के औद्योगिक परिवारों ने स्थापित किया। 1953 में सिंघानिया परिवार द्वारा कल्पी रोड पर बना जे.के. मंदिर (राधाकृष्ण मंदिर) पूर्वाभिमुख संगमरमर के गर्भगृह में 5 बजे मंगला आरती करता है — विषुव पर पहली सूर्य-किरण मूर्ति के चरणों पर पड़ती है। महेश्वरी मोहाल का जैन ग्लास मंदिर — काँच-मोज़ेक की सजावट के लिए प्रसिद्ध — 5:30 बजे सबसे जल्दी दर्शन देता है। गोविंद नगर का इस्कॉन कानपुर 4:15 बजे मंगला आरती करता है। नगर से 25 किमी दूर गंगा-तट पर स्थित बिठूर ब्रह्मावर्त घाट कार्तिक पूर्णिमा स्नान का बड़ा ब्रह्म मुहूर्त तीर्थ है — साढ़े तीन बजे से तट की चौड़ी पत्थर-सीढ़ियाँ श्रद्धालुओं से भर जाती हैं। कल्याणपुर का तुलसी उपवन आश्रम — स्वामी अखंडानंद के एक शिष्य द्वारा स्थापित — सुबह 4 बजे केवल वेदांत-स्वाध्याय करता है।
