लखनऊ में ब्रह्म मुहूर्त की परंपरा
लखनऊ का ब्रह्म मुहूर्त उसके नदी-तटीय मंदिरों और पुरानी क़िस्सा-ख़्वानी गलियों में बचा है। गोमती के पश्चिमी तट पर हनुमान सेतु मंदिर मंगलवार को — मंदिर का सबसे व्यस्त दिन — 4:30 बजे पहली पूजा करता है, और भक्त नगर भर से चलकर अग्रिम पंक्ति में आते हैं। अलीगंज हनुमान मंदिर की प्रातः परिक्रमा 5 बजे शुरू होती है, और जेष्ठ मास के 'बड़ा' और 'छोटा' मंगल यहीं मनाए जाते हैं। सीतापुर रोड पर नगर से 28 किमी उत्तर बनी चंद्रिका देवी मंदिर नवरात्रि का बड़ा ब्रह्म मुहूर्त-समागम स्थल है; अवध के गाँवों से तीर्थयात्री रात भर रुककर पूर्व-भोर की जोत में सम्मिलित होते हैं। बारगाँव का इस्कॉन लखनऊ 4:30 बजे मंगला आरती करता है। पुराने शहर के बीचों-बीच आदि गंगा का भूतनाथ मंदिर — जहाँ 1880 से दर्ज मारवाड़ी ब्राह्मण परिवारों की वंश-परंपरा भोर के पहले प्रकाश पर जल-अर्पण करती आ रही है।
