आगरा में ब्रह्म मुहूर्त की परंपरा
आगरा का ब्रह्म मुहूर्त एक अनूठा आधुनिक आयाम रखता है — ताज महल भारत के उन कुछ यूनेस्को स्मारकों में से है जहाँ दर्शक नियमित रूप से पूर्व-भोर के समय प्रवेश करते हैं। अधिकांश दिनों में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण पूर्वी द्वार सूर्योदय से 30 मिनट पहले खोलता है, और ब्रह्म मुहूर्त की रोशनी में सफ़ेद संगमरमर का दर्शन दुनिया के विशिष्ट पूर्व-भोर अनुभवों में गिना जाता है। ताज से परे, मथुरा-बृंदावन का ब्रह्म मुहूर्त-मण्डल 50 किमी उत्तर है: बृंदावन के बांके बिहारी मंदिर की काकड़ आरती 5 बजे होती है और मूर्ति को विशेष प्रातः-संकल्प से जगाया जाता है; बृंदावन का इस्कॉन 4:30 बजे मंगला आरती करता है और उत्तर भारत भर से भक्त आते हैं। मथुरा के कृष्ण जन्मस्थान परिसर का पहला दर्शन 5 बजे होता है। आगरा का दयालबाग़ आश्रम (राधास्वामी सत्संग बेआस) 4 बजे ब्रह्म मुहूर्त-ध्यान करता है — आश्रमवासियों के लिए अनिवार्य और सत्संगी आगंतुकों के लिए अतिथि-पास के साथ खुला।
