लुधियाना में ब्रह्म मुहूर्त की परंपरा
लुधियाना का ब्रह्म मुहूर्त सिख परंपरा के 'अमृत वेला' में जीवित है। नगर का हर गुरुद्वारा — नानकसर, अलामगिर का गुरुद्वारा मंजी साहिब (नगर से 9 किमी पश्चिम, जहाँ गुरु गोबिंद सिंह जी 1705 में ठहरे), गुरुद्वारा चरण कमल, और लुधियाना के आसपास के दर्जनों गाँव-गुरुद्वारे — 4:30 बजे से नितनेम (जपजी साहिब, जाप साहिब, त्व-प्रसाद सवैये, चौपई, और आनंद साहिब का प्रातः पाठ) करते हैं। यही ठीक ब्रह्म मुहूर्त है। पखोवाल रोड का पंजाब माता मंदिर 5:30 बजे मंगला आरती करता है। कृष्ण पुरा का इस्कॉन लुधियाना 4:30 बजे मंगला आरती चलाता है। ध्यान देने योग्य बात — पंजाब की कृषि-लय (बुआई, मँडाई, डेयरी का काम) पहले से 4:30 बजे की शुरुआत पर चलती है, इसलिए सिख संस्थागत समय-सारणी ब्रह्म मुहूर्त से इतनी पूरी तरह मेल खाती है। 1469 की जनम साखी परंपराओं में दर्ज है कि गुरु नानक देव जी सूर्योदय से पूर्व बेईं नदी के पास जागकर ध्यान करते थे — मूल आदर्श।
