नासिक में ब्रह्म मुहूर्त की परंपरा
नासिक का ब्रह्म मुहूर्त दो तीर्थ-मण्डलों को जोड़ता है — त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग गलियारा और पंचवटी राम-सीता गलियारा — दोनों नगर से 35 किमी के भीतर हैं। 35 किमी पश्चिम त्र्यंबकेश्वर 5:30 बजे काकड़ आरती करता है — गोदावरी के स्रोत पर बने मंदिर के पत्थर के गर्भगृह में, पर गाँव के पुरोहित-समाज साढ़े तीन बजे उठकर 'त्र्यंबकं यजामहे' मंत्र का सस्वर पाठ करते हैं और घाटी में गूँज भर देते हैं। पंचवटी का काला राम मंदिर — जहाँ राम-सीता ने वनवास का कुछ समय बिताया — 5 बजे सबसे जल्दी आरती करता है; मंदिर की लकड़ी की राम मूर्ति उत्तर भारतीय वैष्णवपरंपरा में अनूठी है। 55 किमी उत्तर वाणी पहाड़ी पर सप्तश्रृंगी मंदिर बड़ा नवरात्रि ब्रह्म मुहूर्त-तीर्थ है — नौ रातों में श्रद्धालु पूर्व-भोर के अँधेरे में 510 सीढ़ियाँ चढ़ते हैं। सुंदर नारायण मंदिर में होली पर सूर्य-किरण-घटना होती है: इसी एक दिन की पहली सूर्य-किरण मंदिर के द्वार से होकर मूर्ति के चरणों पर पड़ती है।
