पटना में ब्रह्म मुहूर्त की परंपरा
पटना का ब्रह्म मुहूर्त एक पूर्वी भारतीय नगर में तीन परंपराओं को जोड़ता है। पटना जंक्शन के पास महावीर मंदिर पूर्वी भारत के सबसे जल्दी खुलने वाले मंदिरों में से है — 5 बजे का पहला दर्शन हर मंगलवार और शनिवार हज़ारों भक्तों को खींचता है; जाड़ों में क़तार-प्रबंधन साढ़े तीन बजे से शुरू होता है। तख़्त श्री पटना साहिब गुरुद्वारा — गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्मस्थान और सिख धर्म के पाँच तख़्तों में से एक — गुरपुरब पर 4:30 बजे से आसा दी वार का कीर्तन करता है, जो ब्रह्म मुहूर्त की सिख अभिव्यक्ति 'अमृत वेला' है। महाबोधि परंपरा पटना तक 95 किमी दक्षिण बोधगया से पहुँचती है, जहाँ महाबोधि महाविहार सर्दी के साधना-शिविरों में बोधि वृक्ष के चारों ओर 4 बजे परिक्रमा करता है। 95 किमी दक्षिण-पश्चिम गया का विष्णुपद मंदिर — विष्णु के चरण-चिह्न पर बना — 5 बजे पहला अभिषेकम करता है, और पितृ पक्ष के पिंड दान विधान ब्रह्म मुहूर्त में शुरू होते हैं। पटना के उत्तर गंगा-गंडक संगम पर सोनपुर मेला नवंबर में वैष्णव बैरागी संतों को ब्रह्म मुहूर्त-दर्शन के लिए खींचता है।
