इंदौर में ब्रह्म मुहूर्त की परंपरा
इंदौर का ब्रह्म मुहूर्त नगर के दो मुख्य मंदिरों — खजराना गणेश और अन्नपूर्णा माता — से जुड़ा है। खजराना गणेश मंदिर, नगर का सबसे लोकप्रिय देवस्थान, 5 बजे मंगला आरती करता है, और बुधवार की भोर का इंदौरी रिवाज़ ख़ास है: मंदिर तक का पूरा मार्ग 4 बजे से भक्तों के घरों के दीयों से जगमगा उठता है। तिलक नगर का अन्नपूर्णा माता मंदिर अपनी ब्रह्म मुहूर्त-भोग परंपरा के लिए जाना जाता है — दिन का पहला पकवान-भोग मंदिर रसोई में साढ़े तीन बजे से बनता है और पूर्व-भोर में आए श्रद्धालुओं को बांटा जाता है। नगर के दक्षिणी छोर की पहाड़ी पर बना बिजासेन माता मंदिर नवरात्रि में पूर्व-भोर ही चढ़कर ब्रह्म मुहूर्त-दर्शन के लिए जाना जाता है; चढ़ाई स्वयं तप मानी जाती है। नर्मदा के तट पर इंदौर से 90 किमी दूर महेश्वर के घाट — अहिल्याबाई द्वारा पुनर्निर्मित — नर्मदा जयंती में 4 बजे से तीर्थयात्रियों से भर जाते हैं। भँवरकुआँ का इस्कॉन इंदौर 4:30 बजे की मंगला आरती करता है।
